4+best motivational story for students in hindi-(लघु कथायें)

 motivational story for students in hindi



बुढ़िया और उसका मुर्गा-(1 motivational story for students in hindi)


एक समय की बात है एक गांव में एक बुढ़िया रहती थी। बुढ़िया का इस दुनिया में कोई ना था। इसलिए गांव वाले ही उसकी देख रेख करते थे।और खाने को कुछ दे दिया करते थे। बुढ़िया के पास एक मुर्गा था। जो रोज सुबह बोलता था । उसे लगता था कि जब उसका मुर्गा बोलता है, तभी सूरज निकलता है



और उसकी आवाज़ सुनकर गांव वाले उठते थे। एसे ही दिन बीतते गए। धीरे धीरे गाव वालो ने बुढ़िया का ध्यान रखना बंद कर दिया। तो एक दिन उसने गांव वालो से कहा कि मैं ये गांव छोड़कर जा रही हू। अब गाव वालो ने सोचा कि यदि बुढ़िया चली गई तो हम लोगों अंधेरे में रहेंगे,


क्योंकि मुर्गा सुबह बोलेगा नहीं और सूरज निकलेगा नहीं। तो गाव वालों ने बुढ़िया से कहा कि नहीं हम तुम्हारा पूरा ध्यान रखेंगे। बुढ़िया रुक गई। लेकिन बुढ़िया का लालच बढ़ता ही जा रहा था। वह गांव वालो से अधिक मांग करने लगी।कुछ दिन और हुए और बुढ़िया ने कहा कि नहीं अब वह यहां नहीं रुकेगी वह अपना मुर्गा लेकर जा रही है।





गांव वालो ने बहुत समझाया पर उसने एक ना सुनी। और गाव वाले परेशान हो गए। की कल सूरज केसे निकलेगा। गांव वाले पूरी रात सोये नहीं और जेसे ही सुबह हुई सूरज निकल गया। गांव वाले समज गए कि बुढ़िया उन्हें मुर्ख बना रही थी। अगले दिन बुढ़िया फिर आई और गांव वालो से बोली कि वह अब उन्हें छोड़कर नहीं जाएगी। लेकिन गाँव वालो ने उसकी एक ना सुनी और उसकी कभी मदद भी नहीं की।


Moral of the story
इस कहानी से हमे यही सीख मिलती है कि हमें अंधविश्वास पर भरोसा नहीं करना चाहिए और साथ ही बुढ़िया की तरह अधिक लालच करने पर हमारे पास जो थोड़ा कुछ होता है हम वह भी खो देते हैं।
इसी प्रकार अन्धविश्वास मे हम कुछ नहीं पाते हैं अज्ञान हमें मुर्ख बना देता है।

परिक्षा motivational story 


एक बड़े राज्य के राजा के वजीर की मृत्यु हो गई। राजा को बड़ा दुख हुआ क्योंकि उस वजीर के जेसा ईमानदार और ज्ञानी व्यक्ती को ढूँढना बहुत ही मुश्किल था। राजा ने आसपास के नगरों से कई लोग आए पर राजा को अपने राज्य के लिए एक भी काबिल वजीर नहीं मिला। लिहाजा राजा ने सब जगह यह खबर फैलाने का आदेश दिया कहा गया और नये वजीर के लिए प्रतियोगिता  रखी गई

ताकि उसके स्थान पर एक अन्य वजीर को लाया जाए बहुत समय बीता बहुत लोगों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया अखिर में तीन विद्यार्थियों को चुन लिया गया।

 तीनों को राज्य में बुलाया गया और एक कमरे में बिठाया गया कि कल तुम्हारी परीक्षा ली जाएगी जो तुम तीनों मेसे अधिक ज्ञानी होगा और तीनों मे जो सर्वश्रेष्ठ होगा उसे राज्य का वजीर घोषित कर दिया जाएगा। तीनों को एक कमरे में जो डाल दिया गया, उनमें दो अपने साथ में किताबें पुस्तक आदि पढ़ने का सारी सामान लेकर आए थे और वह पढ़ाई करने के लिए बैठ के रात भर वह पढ़ते रहे जबकि तीसरा विद्यार्थी आते ही सो गया और वह सोता ही रहा उन दोनों ने देखा कि इसको कुछ पढ़ी नहीं है। भला ये केसे वजीर बन सकता है।

यह सो ही रहा है यह तो फेल हो जाएगा मूर्ख आदमी है और रात भर अपनी तैयारी करते रहे सुबह राजा के आदेश के अनुसार  तीनों को  एक अन्य  कमरे में बंद कर दिया गया और राजा ने कहा कि दरवाजे पर एक पहेली लिखी हुई है जो भी पहेली का हल पहले निकलेगा। उसे राज्य का वजीर घोषित कर दिया जाएगा। दोनों अपनी पुस्तके लेकर बैठ गए और उस पहेली को हल करने लगे। जबकि तीसरा  विद्यार्थि  चुपचाप बैठ गया, वह देख रहा था कि दोनों क्या कर रहे हैं। दोनों ही पहेली को हल करने की होड़ में लगे हैं। काफी देर तक वह दोनों इस पहेली का हल नहीं कर पाए और तीसरा कुछ तैयारी नहीं कर रहा था।

वह उठा दरवाजा खोला और बाहर चला गया। वो दोनों विद्यार्थियों को पता ही नहीं है कि वह तीसरा विद्यार्थि बाहर चला गया।
वे बस अपनी पहेली का हल करने में लगे हुए थे। राजा ने तीसरे आदमी को राज्य का वजीर घोषित कर दिया और राजा ने तीसरे विद्यार्थि को पूछा कि तुम्हें केसे पता कि दरवाज़ा खुल्ला है।

विद्यार्थि ने कहा कि  दरवाजा तो खुला था क्या भला कोई दरवाजा किसी पहेली से केसे खुल सकता है। दोनों विद्यार्थियों को बहुत ही अफसोस हुआ।

Moral of the story

दोस्तों इस कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है कि विद्यार्थियों को गहन अध्ययन करना चाहिए, उसे समझाना चाहिए ना कि तोते की तरह रट कर इस तरीके का ग्यान व्यर्थ है। किसी ने सही कहा है कि काबिल बनो कामयाबी के पीछे मत भागों।


राजा और संघर्ष-(2 motivational story for students in hindi)


किसी ने बड़ी कमाल की बात की है कि

लाख दलदल हो पांव जमाए रख।
हाथ खाली ही सही ऊपर उठाए रहे
कौन कहता है कि छलनी में पानी नहीं रुक सकता,
बर्फ बनने तक हौसला बनाए रख।


एक छोटी सी कहानी एक बार एक राज्य में बड़ी खुशी थी जनता बहुत खुश थी राजा बहुत ही दानवीर और अपनी प्रजा के हित के लिये कार्य है। और प्रजा  की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहता था। वह बड़ा ही कमाल का योद्धा था। पड़ोसी राज्य के जो राजा थे। इससे पड़ोसी राज्य के राजा उनसे जलने लगे थे। और वे कई बार युद्ध में हार भी चुके थे।

पड़ोसी राजाओं ने सभा बुलाई की किस तरह से चल से राजा को कैद किया जाये। क्योंकि वे सीधे राजा से युद्ध करने से कतराते थे।


क्यों ना चल से इसके राज्य पर कब्जा किया जाए उन्होंने उन्होंने एक योजना बनाई और राजा के कुछ करीबी सिपाहियों को अपने साथ मिला लिया।  सिपाहियों ने राजा के भोजन में  बेहोशी की दवाई मिला दी जिससे राजा बेहोश हो गये।

सैनिक राजा को महल के गुप्त दरवाजे से  पड़ोसी राज्य के जंगल में लेकर आते हैं। एक पहाड़ी होती है वहां पर ले जाते हैं। वहां एक गुफा होती है। राजा को  वहॉं लाकर पटक देते हैं। वहां पर सारे राजा इकट्ठा हो जाते हैं वह कहते हैं क्या किया जाए मार दिया जाए। इतनी राजा में से एक राजा बोला कि इसने हमे बहुत तड़पाया है। हम इसे ना मारकर आजीवन इसी गुफा में बंद कर देते हैं। ताकि ये तड़प तड़प कर अपने प्राण देदे। राजा के हाथ बंधे होते हैं।

और  गुफा के दरवाजे को एक बड़े से पत्थर से बंद कर देते हैं। सैनिकों को आदेश दिया गया। इस बात से खुश थे कि राजा अंदर घुट घुट कर मर जाए। तभी खुश होकर अपने-अपने राज्य वापस चले गए राजा को जब होश आया उसे पता नहीं था। वह कहां पर था उसे यह नहीं पता था जो किस जगह है अब उसका हौसला टूटने लगा था। वह सोचने लगा अब सब कुछ छीन लिया, मेरी प्रजा गई मेरा राज्य गया,

किसी तरह पत्थर से घिसकर वह रस्सी को काट देता है। लेकिन उसके लिए चुनौती थी गुफा के दरवाजे पर प़डा पत्थर। लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने गुफा के पत्थर के नीचे से सूर्य की किरणों को देखा और वहीं से छोटे पत्थर को तोड़ना सुरु किया। राजा बहुत थक चुका था। और उसे खाये पीए काफी दिन बीत गए थे। लेकिन उस ने हिम्मत नहीं हारी और रात दिन उस पत्थर को थोड़ा थोड़ा तोड़ता रहा। और एक समय आया कि उसने गुफा से निकलने के लिए सुरंग बना ली थी। और वह वहां से बाहर आ गया। गुप्त रास्तो से वह किसी तरह महल पहुंच गया और फिर से अपना राज्य स्थापित करने मे कामयाब रहा।

Moral of the story

 छोटी सी कहानी बहुत बड़ी बात सिखाती है। की बुरे समय में भी धर्य से काम करे तो अवश्य ही सफल होते हैं। धर्यoऔर संघर्ष से इंसान अपनी खोई हुये वैभव और सौर्य को पुनः प्राप्त कर सकता है। जिंदगी में अगर आपको मोटिवेशन चाहिए तो सेल्फ मोटिवेशन से अच्छा  कोई आपको मोटिवेट नहीं कर सकता है। और अपने कार्य पर अटल रहे।
Aap apne aap ko motivate kar sakte hain.



गांव वालों का लालच (3 motivational story for student in hindi


इस लघु कथा मे एक छोटा सा गांव था। शहर से भोला आता है। और गाव वालो से कहता है। क्या आप मेरे लिए बंदर पकड़े? मैं एक बंदर का ₹100 दूंगा। गांव में बंदर बहुत थे तो गांव वाले लालच में आ जाते हैं। सब काम छोड़कर बंदरों के पीछे लग जाते हैं।

धीरे-धीरे कोई 10 पकड़ कर लेकर आ रहा है कोई 20 पकड़ के लेकर आए।

वैसे तो भोला गांव वालो को बंदरों के हिसाब से उन्हें पैसे दे देता है। धीरे-धीरे बंदर पूरे खत्म होने लगते हैं तो लोग पास के गांव से लेकर आते हैं।




भोला ने गांव वालों के साथ एक चाल चली। क्योंकि उसकी नीयत पहले से ही खराब थी। उसने एक बंदर के ₹300 कर दिए। लोग फिर। अपना कामकाज छोड़कर। बंदरों के पीछे लग गए।

वैसे करते-करते काफी समय निकल गया। गांव वालों को लगा कि यह बहुत ही। अच्छा तरीका है। पैसे कमाने का। लेकिन उन्हें पता नहीं था कि वह भोला उनके साथ कितना बड़ा धोखा करने वाला है। वह लालच में गांव वाले कुछ समझ ही नहीं पाए। और बंदर पकडते गए काम करते गए अब धीरे-धीरे बंदर कम हो गए।

फिर दिन रमेश उस गांव में आया और बोला कि उसे भी बंदरों की जरूरत है।
 और उसने कहा कि मैं एक बंदर का ₹500 होता है। गांव के लोगों ने कहा कि बंदर तो है ही नहीं बंदर तो सारे हमने पकड़ पकड़ कर ₹200 में दूसरे भोला को बेच दिए है। तो रमेश बोला कि तुम ऐसा काम करो उससे को बंदर ₹500 में खरीद कर मुझे बेच दो।



 में तुम्हें एक बंदर के 1000 रुपये दूँगा । गांव वालो को दुगुना मुनाफा देख लालच आ गया और उन्होंने जितने भी बंद है दिए थे उस पहले वाले भोला से वापस ₹500 रुपए मे खरीद लिये।
बाद में पता चला कि दोनों ही बंदर खरीदने वाले भोला और रमेश दोनों गांव वालों के पेसे लेके भाग गए हैं।
तब तक बहुत देर हो चुकी थी। वे अपने लालच पर शर्मिंदा हुए। और आगे से इस तरह के काम ना करने का प्रण लिया।

Moral of the story

 इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि मैं किसी तरह का लालच नहीं करना चाहिए। हमें अपनी मेहनत की कमाई पर ध्यान रखना चाहिए। आये दिन हमारे गावों में भोला और रमेश जेसे लोग आते हैं और भोले भले गांव वालो को किसी ना किसी रूप में ठग कर चले जाते हैं। किस तरह गांव वालों ने अधिक लालच में आकर बहुत बड़ा नुक़सान किया।बहुत बड़ा नुकसान कर दिया।



जुए का आदि (4 motivational story for student in hindi) - लघु कथा


एक बार एक गरीब आदमी को  लाटरी लग गई उसको लाटरी मे 10 हजार रुपये मिले। अब उसने सोचा क्यों ना इससे जुआ खेला जाय और बहुत सारे पेसे बनाए जाए। एक ही बार में धनवान बन जाऊँ।

 वह जुआ खेलने गया और अपने एक मित्र को भी साथ ले गया। वह जुए में सारे पेसे हार गया। सिर्फ 20 रुपये बच गए। वो उसने घर जाने के लिए किराया रख लिया। वो उस कसीनो से बाहर आया और अपने मित्र से बोला कि यार क्यों ना हम आज pedal ही घर जाए। मे इस 20 रुपये को भी जुए में लगाना चाहता हूं।



ताकि मुझे कोई मलाल ना रहे। वह फिर कसीनो मे गया और जुआ खेलने लगा और वो जितने लगा, वह 20 से 40 और 40 से 100 एसे करते करते वो 10 लाख रुपये तक जीत गया। लेकिन लालच बढ़ता गया उसने सोचा क्यों ना एक ही बार में पूरे पेसे लगा के उसे दुगना कर दु। उसने सारे पैसे लगा दिए और वो सारे पैसे हार गया।

 और चलते ही उसे पैदल घर जाना पड़ा। उसके मित्र ने पूछा कि क्या हुआ तो वह बोला कि वो सारे पैसे हार गया।

Moral of the story

इससे हमे यह सीख मिलती है। की हमे जुए से हमेशा दूर रहना चाहिए। जुए की वज़ह से ही महाभारत का युद्ध हुआ। जुए की आदत मे इंसान अपना सब कुछ खो देता है। हमे अधिक लालच नहीं करना चाहिए। जो हमारे पास है उससे संतुष्ट रहना चाहिए। अन्यथा जो हमारे पास हम उसे भी खो देते हैं।
तो दोस्तों आपको ये motivational story केसी लगी हमें comment करके जरूर बताये।






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